बात इतनी सी है



बात इतनी सी है

की उसके अंदर का डर कभी दूर नहीं कर पाया मैं


बात इतनी सी है

की एक मजबूरी ने हमे दूर रखा है एक दूसरे से


बात इतनी सी है

की अब उसका हाथ थामने का मन है लेकिन हक नहीं


बात इतनी सी है

की पुराने किस्से छेड़ कर उसकी हँसी मैं छीनना नहीं चाहता


बात इतनी सी है

की अब भी बातें करते हुए मैं उससे नज़रें मिला नहीं पाता


बात इतनी सी है

की उसकी सांसों की आवाज़ भी मुझे हर गीत से सुरीली लगती है


बात इतनी सी है

की वो एक दफ्फा मिला और दिल में फिर वही हलचल रहने लगी


बात इतनी सी है

की मीलों चला हूं उसके पीछे लेकिन उसे ही बढ़ाना होगा मंजिल की तरफ कदम आखिरी


बात इतनी सी है

की अब भी गुजरता हूं उसके शहर से लेकिन उसकी इजाजत के बिना मिल नहीं सकता


बात इतनी सी है

की जो जो बातें पहले उसके साथ करता था अब वो पन्नों पर लिख सकता हूं सिर्फ


बात इतनी सी है

की उसका एक इशारा काफ़ी है सब खुशियाँ फिर से जिंदा करने को


Written by.- VkaySingh ✍️




Baat itni si hai



Baat itni si hai

Ki uske ander ka darr kabhi door nhi kar paya main


Baat itni si hai

Ki ek majboori ne hume door rakha hai ek dusre se


Baat itni si hai

Ki ab uska hath thamne ka man hai lekin haq nhi


Baat itni si hai

Ki purane kisse chhed kar uski hansi main chinna nhi chahta


Baat itni si hai

Ki ab bhi baatein karte hue main usse najre mila nhi pata


Baat itni si hai

Ki uski sanso ki aawaj bhi mujhe har geet se surili lagti hai


Baat itni si hai

Ki vo ek daffa mila or dil mein fir wahi halchal rahne lagi


Baat itni si hai ki

Ki milon chala hu uske pichhe pichhe lekin usse hi badhana hogya manjil ki taraf kadam aakhri


Baat itni si hai

Ki ab bhi gujarta hu uske sahar se lekin uski ijaajat ke mil nhi skta

Baat itni si hai

Ki jo jo baatein pahle uske sath karta tha ab vo pano par likh skta hu sirf


Baat itni si hai

Ki uska ek ishara kafi hai sab khushiyan fir se jinda karne ko


Written by.- VkaySingh ✍️


26 views4 comments

Recent Posts

See All